स्वामी विवेकानंद जी के अनमोल वचन को जरूर सुने इससे आपको फायदा मिलेगा

स्वामी विवेकानंद जी के अनमोल वचन को जरूर सुने इससे आपको फायदा मिलेगा

स्वामी विवेकानंद जी के अनमोल वचन को जरूर सुने
स्वामी विवेकानंद जी के अनमोल वचन को जरूर सुने इससे आपको फायदा मिलेगा

भारत के महान क्रांतिकारी वीर में स्वामी विवेकानंद का नाम सर्वोपरि है| स्वामी विवेकानंद से हम बहुत सारी चीज सीख सकते हैं और अपने जीवन में उसको उतार सकते हैं| हमारे जीवन में हमको लक्ष्य की तरफ चलना चाहिए और लक्ष्य की तरफ कैसे चलना चाहिए अपने फोकस को किस तरीके से ठीक करता है इन सभी बातों को स्वामी विवेकानंद ने बहुत बढ़िया तरीके से वर्णन किया है| यदि आप प्रेरणा का स्रोत ढूंढना चाहते हो तो वह आप स्वामी विवेकानंद जी के अंदर देख सकते हो उनके बताए गए बातों को फॉलो कर सकते हो| आज हम ऐसे महान क्रांतिकारी हिंदुत्व के व्यक्ति के बारे में विस्तार से जानेंगे|

हमारे जीवन में कई प्रकार के योग होते हैं जैसे कर्म योग ध्यान योग ज्ञान योग और भी अन्य प्रकार के योग दिन पर हम सही प्रकार से काम नहीं कर पाते| इसका पहला कारण होता है कि हमारे पास उसके लिए ज्ञान नहीं होता| यदि हमारे पास ज्ञान हैं पुस्तक है ज्ञान लेने के लिए तो हमारा कोई मार्गदर्शन करने के लिए नहीं होता| लेकिन आज के इस पोस्ट में आपको ज्ञान और साथ में मार्गदर्शन दोनों ही मिल जाएंगे|

जीवन में किसी भी काम को करने से पहले उस काम के लिए हमें तत्पर रहना पड़ता है| स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है उठो मेरे शेरो इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो| भागवत गीता में भी कुछ इसी प्रकार बताया गया है कि मानव का शरीर हमेशा भौतिक सुख हो जाता है लेकिन उसमें छिपा आत्मा यदि आध्यात्मिक जगत को जान ले तो भौतिक जगत की कोई महत्व नहीं रह जाएगा|

यदि आप जीवन में कुछ अच्छा करना चाहते हो आगे बढ़ना चाहते हो तो आपको यह खाना पड़ेगा कि जो आप कर रहे हो वह आपके लक्ष्य में योगदान दें| हमेशा अपने जीवन के हर पल को 1% बेहतर बनाना चाहिए| यदि आप दिल्ली एक प्रतिशत अपने आप को बेहतर बनाओगे तो यह आपको 90 दिनों के अंदर में एक बहुत बड़ा कंपाउंडिंग रिजल्ट देगा| और यह आपको आपके लक्ष्य को हासिल करने में बहुत बड़ी योगदान देगा|

स्वामी विवेकानंद जी ने काफी जगह का भ्रमण किया है जिसके बाद उन्होंने मानव जगत को एक निर्देश दिया है| स्वामी जी कहते हैं कि वह अनेकों देश में भ्रमण कर चुके हैं और इसके पश्चात उन्होंने एक निष्कर्ष निकाला है| वह कहते हैं कि दुनिया में संगठन के बिना संसार में कोई भी महान और स्थाई कार्य नहीं किया जा सकता है| यानी कि कुछ बढ़िया करने के लिए आपको सबसे पहले संगठन बनाना पड़ेगा एक टीम बनानी पड़ेगी|

संभव की सीमा जानने का एक ही तरीका है असंभव से भी आगे निकल जाओ| जीवन में यदि आप अपने लक्ष्य को संभव करना चाहते हो| यदि आप चाहते हो कि आपका लक्ष्य संभव हो जाए तो आपको उन सभी चीजों को करना पड़ेगा जो आपको लगता है कि असंभव है| अर्थात आपको सभी कार्य करने पड़ेंगे जो लक्ष्य में योगदान दें|

स्वामी जी कहते हैं आज का आप जैसे प्रयोग करोगे वह वैसे ही काम करेगी| अग्नि आपको जीवन देती है आपको खाना बनाने में सहयोग करके आपको सर्दियों से बचा के| लेकिन यदि आप उसे गढ़ में का गलत उपयोग करोगे उसका इस्तेमाल किसी का घर जलाने में करोगे तो उसका गलत परिणाम होगा| अर्थात आप किसी भी चीज का सकारात्मक प्रयोग और नकारात्मक प्रयोग कर सकते हैं|

जीवन में यदि आपको कुछ सीखना है आपको आध्यात्मिक बनना है या आपको किसी भी प्रकार का कोई बिजनेस खड़ा करना है| तो सबसे पहले आप को मनाना पड़ेगा| सबसे पहले आपको अपनी आत्मा को मनाना पड़ेगा यदि वह मान जाए तो दुनिया की हर एक चीज मान जाएगी| और आप अपना लक्ष्य पूरा कर सकोगे| यदि आप अपनी आत्मा को आप नहीं मना पाते हो तो आपको दुनिया की कोई ताकत आपका लक्ष्य पूरा करने में योगदान नहीं दे सकती|

जीवन में अनुभव की एक अलग ही पहचान होती है| मानव का सबसे बड़ा शिक्षक उसका खुद का अनुभव होता है| जब तक जीवन है तब तक सीखते रहो| अनुभव से बड़ा कोई भी ज्ञान नहीं|

यदि आप अपने सभी समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हो तो उसके लिए एक ही जगह है शमशान| क्योंकि मनुष्य को इस भौतिक जगत में कुछ ना कुछ तो समस्याओं का सामना करना ही पड़ता है| समस्याओं से ऊपर उठना मानव के हाथ में हैं| लेकिन हमेशा के लिए मानव समस्याओं को खत्म नहीं कर सकता कुछ ना कुछ समस्याएं तो रहेंगे ही|

जीवन में अपने शरीर को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी होता है| स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं बल ही जीवन है और दुर्बलता मृत्यु| अर्थात आपका शरीर जब तक बढ़िया है तब तक आप अपने लक्ष्य को पूरा करने में पूरी तरीके से योगदान दे सकते हो| लेकिन जो भी आप दुर्बलता के नजदीक आते हो तो आप अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर सकते और यह आपको मृत्यु तक लेकर जाता है|

एक सूरज इंसान के अंदर भी होता है वह होता है इंसान का फोकस| यदि मनुष्य अपने इंद्रियों को एकजुट कर लेता है तो वह सूर्य के समान चमकने लगता है| मनुष्य को चाहिए कि वह अपने लक्ष्य को अपने फोकस से एक आग्रह कर ले|

मनुष्य के पास दिल और दिमाग दोनों ही मौजूद होती है| भौतिक जगत में मनुष्य परेशान रहते हैं कि दिल की सुने या दिमाग की| इस पर स्वामी जी ने कहा है यदि दिल और दिमाग दोनों अलग-अलग जवाब दें तो इस मामले में आपको अपने दिल की सुननी चाहिए|

जीवन में यदि कोई पाप है तो भेजे हैं मनुष्य की दुर्बलता| स्वामी जी कहते हैं एक स्वस्थ व्यक्ति अपने शरीर से अपने लक्ष्य को पाने में सक्षम होता है| लेकिन यदि कोई व्यक्ति दुर्बलता हो जाता है| तुम्हें अपने लक्ष्य को पाने में असमर्थ रहता है| इसीलिए स्वामी जी कहते हैं दुर्बलता पाप है दुर्बलता मृत्यु के समान है|

स्वामी जी के अनमोल वचन सुनने के बाद आपको कैसा महसूस हो रहा है| यदि आप इन अनमोल बातों को अपने फ्रेंड के साथ अपने रिलेशनशिप के साथ या अपने रिश्तेदारों में शेयर करना चाहते हो तो आपके लिए यह बेहतर साबित होगा| कहते हैं जीवन में यदि कुछ अच्छा करना चाहते हो तो पहले दूसरों का अच्छा करो तुम्हारा अच्छा अपने आप हो जाएगा| इस पोस्ट को सब जगह शेयर कर दो ताकि सभी का भला हो और जिसकी वजह से आपका भी भला होगा|| इस आर्टिकल को एंड तक पढ़ने के लिए आपको दिल की गहराइयों से प्रेम पूर्वक बहुत-बहुत धन्यवाद|


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